Thursday, May 16, 2013

कितना कर्ज... उतरेगा ना माँ





जरा छू ले मुझे माँ, तेरे आँचल से, मेरा चेहरा
ढककर लोरी सुना, मैं तेरा अंश, तेरा प्रेम-रूप
ना जाने कितना कर्ज, उतरेगा ना माँ

मैंने देखा है, ईश-रूप, तुझमें ही माँ
जिसे हरपल मेरी, ही परवाह है
एक बार भी खयाल, नहीं तुझे अपना
मेरी खुशियों में ही, तू क्यों खुश है माँ

तुझे जब भी दिया, मैंने दुख ही दिया
फिर क्यों, मेरा छोटा-सा दुख भी तुझे
करता है, परेशाँ, बता दे ना माँ

जाने तू  रब है कि रब तुझमें है
तुझे कैसे पता कि मेरी ख़ुशी क्या
एक बार तो बता कि तेरी ख़ुशी क्या
फिर जाँ भी न्यौंछावर, तेरे चरणों में माँ



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Photo Source: Google

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